दिल्ली NCR

दिल्ली के मोहन गार्डन में धूमधाम से मनायी गई जानकी नवमी

नई दिल्ली, संवाददाता: जनजागृति मंच दिल्ली के तत्वावधान में शुक्रवार को मोहनगार्डन में पहली बार वैशाख शुक्ल नवमी को सीता नवमी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने पूरे उत्साह के साथ माता सीता की जयंती मनाई। मोहन गार्डन के एल ब्लाक स्थित जानकी एसोसियेट्स परिसर में भव्य पंडाल लगाकर समारोह का आयोजन हुआ। सीता माता के जीवन से संबंधित एक झांकी भी लगाई गई।

समारोह का आरंभ सुन्दर काण्ड पाठ से हुआ। पंडित रीतेश झा की अगुआई में भावविभोर होकर लोगों ने सुन्दर काण्ड का गायन किया। सुन्दर काण्ड पाठ के बाद विभिन्न वक्ताओं ने सीताजी के जीवन चरित से संबंधित विविध पक्षों पर चर्चा की। इसमें जानकी एसोसियेट्स के मनोज राय, अनिल राय के अलावा मनोज झा, इन्द्रप्रस्थ मैथिल मंच के टी एन झा, ललन मिश्रा, राकेश मिश्रा, अजीत जी के अलावा स्थानीय पूर्व निगम पार्षद कृष्णा गहलोत ने भी हिस्सा लिया।

इससे पहले जनजागृति मंच के महासचिव चण्डेश्वर ठाकुर ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि माता सीता मैथिल समाज में आदि शक्ति के रूप में पूजित हैं। उनके प्राकट्य दिवस पर आप लोगों का स्वागत करते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि विगत फरवरी मार्च में जनजागृति मंच की ओर से अयोध्या से लेकर सीताजी की जन्मभूमि पुनौराधाम सीतामढ़ी तक छब्बीस दिवसीय जागरुकता पद यात्रा निकाली गई थी ताकि लोगों तक यह सन्देश पहुँचे कि सीताजी का प्राकट्य स्थान मिथिला वर्तमान बिहार के सीतामढ़ी जिला स्थित पुनौराधाम है।

इस अवसर पर जनजागृति मंच के अध्यक्ष के एन झा ने कहा कि इस वर्ष जनवरी में अयोध्याजी में श्रीराम का भव्य नव निर्मित मन्दिर का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पूरे देश में उत्साह का माहौल था लेकिन मीडिया में विशेष रूप से अनेक टेलीविजन चैनलों पर सीताजी को लेकर भ्रामक जानकारियाँ फैलायी गईं । मीडिया में श्रीराम की ससुराल नेपाल के जनकपुर का बार-बार उल्लेख किया गया जो कि तथ्यात्मक रूप से ना केवल गलत है बल्कि भारतीय इतिहास और सनातन संस्कृति को दूषित करने वाला है। श्री झा ने कहा कि मीडिया के इस नैरेटिव का जनजागृति मंच विरोध करता है क्योंकि यह मिथिला के साथ अन्याय है। श्रीराम की ससुराल मिथिला है। त्रेता युग में विश्वामित्र मुनि के साथ श्री राम और लक्ष्मण नेपाल नहीं मिथिला पहुँचे थे। मिथिला के राजा जनक की राजधानी में आयोजित धनुषयज्ञ में राम ने धनुष भंग किया था। लेकिन मिथिला का उल्लेख नहीं कर राम की ससुराल नेपाल के जनकपुर को बताना एक बहुत गलत नैरेटिव सेट करना है।

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जनजागृति मंच के अध्यक्ष के एन झा ने कहा कि लोगों तक सही तथ्य के प्रचार प्रसार के लिए हमने इस वर्ष फरवरी -मार्च में अयोध्या से पुनौराधाम सीतामढ़ी तक की २६ दिवसीय पदयात्रा की। जानकी ज्योति जागृति यात्रा २०२४ के नाम से आयोजित यह पदयात्रा अत्यंत सफल रही। दिल्ली से इस यात्रा संकल्पना को समर्थन देते हुए विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अन्तराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपनी शुभाकामना दी। अयोध्या में श्रीराम तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने श्री राम जानकी पताका दिखाकर इस यात्रा को विदा किया।

श्री झा ने कहा कि हमारी पदयात्रा का व्यापक प्रचार प्रसार सभी प्रमुख अखबारों ने किया । उन्होंने कहा कि हमारे संकल्प और प्रयासों से प्रभावित होकर बिहार सरकार ने जानकी प्राकट्य स्थल पुनौराधाम के विकास के लिए ११ सदस्यीय पांच वर्षीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। इसके अलावा पुनौराधाम के विकास के लिए बिहार सरकार ने सैद्धांतिक रूप से पचास एकड़ जमीन और अधिग्रहित करने का फैसला किया।

जानकी नवमी के अवसर पर जन जागृति मंच की ओर से अयोध्या-पुनौरधाम पदयात्रा करने वाले यात्रियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया गया। इनमें सर्वश्री सतीश चौहान, नन्द किशोर महतो, डिलन सिंह, डॉ प्रदीप कुमार झा, के एन झा, मनोज पाठक, हरिशंकर तिवारी आदि सम्मिलित रहे।

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