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Darbhanga Lok Sabha Seat: दरभंगा में कांग्रेस के बाद बीजेपी का रहा है लंबे समय तक वर्चस्व।

भारत वीकली , डेस्क। मिथिला की पहचान पग पग पोखर माँछ मखान रही है और यहाँ की सबसे महत्वपूर्ण दरभंगा लोकसभा सीट की बात करें तो यहाँ पर आजादी मिलने के बाद से देश में आपातकाल लगने तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा। इसके बाद यहां भारतीय लोक दल, लोक दल, जनता दल, राजद और बीजेपी का प्रभाव दिखा। मिथिला लोक संस्कृति के केंद्र दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा मुद्दा कोसी की बाढ़ और यहां के कई इलाके में पड़ने वाला सुखाड़ है। आम, पान और मखाना की खेती और मछलीपालन के लिए प्रसिद्ध दरभंगा लोकसभा सीट की पहचान इसके गौरवशाली अतीत और समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपराओं से रही है। दरभंगा राज परिवार की शौन-शौकत, दानवीरता, कला और शिक्षा को लेकर ललक वगैरह को शिद्दत से याद किया जाता है।

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दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण

दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। इनमें दरभंगा नगर, दरभंगा ग्रामीण, बहादुरपुर, अलीनगर, बेनीपुर और गौड़ा बौराम विधानसभा सीट शामिल है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, दरभंगा लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी 13,07,067 है। इसमें 6,01,794 महिला और 7,05,273 पुरुष मतदाता हैं। दरभंगा लोकसभा सीट पर ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम वोटर निर्णायक होते हैं। इस लोकसभा सीट पर मुसलमान वोटरों की संख्या साढ़े तीन लाख है। जबकि यादव और ब्राह्मण जाति के वोटरों की संख्या तीन-तीन लाख के करीब है। सवर्ण जातियों में राजपूत और भूमिहार वोटरों की आबादी एक-एक लाख है। सहनी समेत कई अतिपिछड़ी जातियों के अलावा अनुसूचित जाति के वोटर भी ठीक ठाक संख्या में हैं।

दरभंगा से जीतने वाले पांच सांसद केंद्र में मंत्री रहे

आजादी के बाद ललित नारायण मिश्र ने दरभंगा को देशभर में पहचान दिलाई। हाल के दशक में दरभंगा एयरपोर्ट और दरभंगा एम्स को लेकर राजनीतिक चर्चा ने भी इस लोकसभा सीट को सुर्खियों में रखा है। दरभंगा लोकसभा सीट से जीतने वाले पांच सांसद केंद्र में मंत्री रहे हैं। इनमें सत्यनारायण सिन्हा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और फिर सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने। उनके बाद 1973-75 तक ललित नारायण मिश्र रेल मंत्री रहे। कैबिनेट में पंडित हरिनाथ मिश्र को भी जगह मिली। शकिलुर्ररहमान चार माह तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे। 1991 में मो. अली अशरफ फातमी भी केंद्रीय राज्य मंत्री बने थे।

दरभंगा लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास

दरभंगा लोकसभा सीट पर 1952 से 1971 के आम चुनाव तक लगातार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार जीतते रहे। आपातकाल के बाद 1977 में दरभंगा लोकसभा सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल गई। इसके बाद 1980 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया, लेकिन उसके बाद फिर कभी दरभंगा में जीत नहीं पाई। दरभंगा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा बार बीजेपी का कब्जा रहा। उसके बाद जनता दल और राजद का नंबर है।

1999 के बाद बस एक बार बीजेपी ने गंवाई सीट

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 1999 में एनडीए बनने के बाद दरभंगा लोकसभा सीट पर कीर्ति झा आजाद ने पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। वाजपेयी ने दरभंगा के राज मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया था। दरभंगा में ससुराल होने का लाभ भी कार्ति झा आजाद को मिला था। इसके बाद महज एक बार 2004 में राजद ने दरभंगा सीट को झटका, लेकिन उसके बाद से लगातार दरभंगा लोकसभा सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है।

लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने पूर्व विधायक डॉ. गोपाल जी ठाकुर को उतारा था। उन्होंने राजद के उम्मीदवार अब्दुल बारी सिद्दीकी को हराया था। लोकसभा चुनाव 2024 में एक बार फिर बीजेपी और जदयू साथ है। दरभंगा सीट पर दोनों ही दल अपना दावा करते हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि लोकसभा सीट उसके कोटे में मिल सकती है।
दरभंगा लोकसभा सीट से अब तक के सांसद

1957 : श्रीनारायण दास एवं रामेश्वर साहू, कांग्रेस (दो सीटें)
1962 : श्रीनारायण दास, कांग्रेस
1967 : सत्यनारायण सिन्हा, कांग्रेस
1971 : विनोदानंद झा, कांग्रेस
1972 : ललित नारायण मिश्र, कांग्रेस, (उप चुनाव)
1977 : सुरेंद्र झा सुमन, जनता पार्टी
1980 : हरि नाथ मिश्र, कांग्रेस इंदिरा
1984 : विजय कुमार मिश्र, लोक दल
1989 : शकीलुर्र रहमान, जनता दल
1991 : मो. अली अशरफ फातमी, जनता दल
1996 : मो. अली अशरफ फातमी, जनता दल
1998 : मो. अली अशरफ फातमी, राजद
1999 : कीर्ति आजाद, बीजेपी
2004 : मो. अली अशरफ फातमी, राजद
2009 : कीर्ति आजाद, बीजेपी
2014 : कीर्ति आजाद, बीजेपी
2019 : डॉ. गोपाल जी ठाकुर, बीजेपी

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