दिल्ली NCR

राष्ट्रीय राजधानी के हिन्दी भवन में आयोजित हुआ मैसाम द्वारा वसंतोत्सव

वसंतोत्सव में देर शाम तक बहती रही भाव सरिता

वसंतोत्सव में देर शाम तक बहती रही भाव सरिता

राष्ट्रीय राजधानी के हिन्दी भवन में आयोजित हुआ मैसाम का यह सलाना साहित्योत्सव

मैथिली साहित्य महासभा (मैसाम) के तत्वावधान में बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के विष्णु दिगम्बर मार्ग, आईटीओ स्थित हिन्दी भवन में ‘वसंतोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। आनंद, उमंग और उत्साह से भरे इस साहित्यिक उत्सव में देश भर के दो दर्जन से भी अधिक नामचीन कवियों एवं साहित्यकारों ने इस आयोजन में भाग लेकर इसे गरिमामय स्वरूप प्रदान किया।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और अतिथि सम्मान के बीच मैसाम महासचिव सोनी चौधरी की अगुवाई में कवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनि गीत ‘जय जय भैरवि…’ के सामूहिक गायन से हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार त्रय अजीत आजाद, डा आभा झा एवं मणिकांत झा के संग चेतना समिति, पटना के सचिव उमेश मिश्र की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। जबकि कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री मृदुला प्रधान ने की। अतिथियों का स्वागत मैसाम के अध्यक्ष राहुल झा ने किया। स्वागत संबोधन में उन्होंने मैसाम द्वारा हर साल आयोजित किए जा रहे ‘वसंतोत्सव’ के आयोजन के उद्देश्य की विचार से चर्चा करते हुए भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में इसकी प्रभावकारी भूमिका को रेखांकित किया।


‘वसंतोत्सव’ के अंतर्गत आयोजित भव्य कवि गोष्ठी में देर शाम तक श्रोता भाव सरिता में गोते लगाते रहे। उपस्थित कवियों एवं कवयित्री ने प्रेम, वसंत एवं मिथिला-मैथिली उत्कर्ष पर आधारित मैथिली कविता, गीत, गजल व हास्य-व्यंग्य रचनाओं का पाठ करते हुए श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। सविता झा सोनी के संचालन एवं उज्ज्वल कुमार झा के संयोजन में आयोजित वसंतोत्सव में सागर झा, मुकेश आनंद, अखिलेश मिश्र दाउजी, अर्चना झा, डा बद्रीकान्त झा, राज किशोर मिश्रा, वंदना चौधरी, प्रभा झा, बद्रीनाथ राय, सांत्वना मिश्र, सुशीला ठाकुर, कैलाश कुमार झा, निशा झा, आनंद दास, वंदना स्वाभिमान, ज्योति झा, सुधा ठाकुर, हेमंत झा, संस्कृति मिश्र, जयंती झा, धीरेन्द्र झा धीरेन्द्र, मनीष रंजन झा, भावना मिश्र, रमेश चन्द्र झा, सोनी चौधरी आदि ने अपनी रचनाओं से समां बांधे रखा।
कार्यक्रम में मैथिली और हिन्दी की विगत दिनों दिवंगत हुई वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डा उषा किरण खाँ के निधन पर एक मिनट का मौन धारण कर दिवंगत पुण्यात्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। काव्यपाठ के उपरांत अपने वक्तव्यमे अतिथियों ने वर्तमान समय में मैथिली कविता की दशा और दिशा पर प्रकाश डालते हुए गोष्ठीमे काव्यपाठ करने वाले कवियों से मैथिली काव्य को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए निरंतर अच्छी रचना करते रहने का आह्वान किया। धन्यवाद ज्ञापन मैसाम के सदस्य अखिलेश मिश्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मैसाम के महासचिव केशव झा, उपाध्यक्ष क्रमशः संजीव सिन्हा , सुबोध झा , मनोज झा , सचिव राहुल झा वत्स, सदस्य राज किशोर मिश्र एवं कार्यालय सचिव आनंद दास आदि की भूमिका सराहनीय रही।

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