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सह-सचिव की मनमानी से उपजा है श्यामा मंदिर बलि प्रथा विवाद – उपाध्यक्ष

दरभंगा , भारत वीकली।

सह-सचिव की मनमानी से उपजा है आक्रोश -उपाध्यक्ष

वैष्णव होते हुए भी मैं कट्टर शाक्त रहा हूँ। जन जागरूकता व लोक संवाद के बिना मौखिक आदेश देकर बिगाड़ा गया माहौल। उक्त बातें श्यामा मंदिर में उपजाए गए विवाद के बीच माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष प्रो.जयशंकर झा ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहीं।

आगे प्रो.झा ने कहा कि किसी नियम को लागू करने से पहले अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव समेत सभी न्यासियों से कार्य पुस्तिका पर लिखित अनुमोदन लेना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ कार्य पुस्तिका पर अनुमोदन लेना तो दूर सह सचिव प्रो.श्रीपति त्रिपाठी ने किसी से इतने संवेदनशील मुद्दे पर दूरभाष पर भी परामर्श लेना मुनासिब नहीं समझा।जबकि सह-सचिव न्यास समिति में सचिव सह जिलाधिकारी के निर्देश पर ही आदेश निर्गत कर सकते हैं।

साथ ही प्रो.झा ने अध्यक्ष और सचिव सह जिलाधिकारी से अपील की है कि 12 वर्षों से न्यास में काबिज रहने के बाद आखिर किस मंशा से सह-सचिव प्रो. श्रीपति त्रिपाठी ने गलत ढंग से अचानक इस चिंगारी को भड़काया है इसकी न्यायिक जाँच करवाकर सत्य को उजागर कर सार्वजनिक किया जाय। सनातन की सभी उपासना पद्धतियों का सम्मान करता हूँ। सनातन धर्म के तीनों संप्रदाय क्रमशः शाक्त, शैव, वैष्णव के बीच मिथिला में परस्पर सामंजस्य रहा है जिससे सनातन सुदृढ़ होता रहा है। अंत में प्रो.झा ने कहा कि स्थानीय वस्तुस्थिति से श्यामा न्यास समिति बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष अखिलेश जैन को भी अवगत करायेगी। गौरतलब है कि संस्थापक न्यासी के रूप में माँ श्यामा की ख्याति को दूर-दूर तक पहुंचाने के उद्देश्य से श्यामा कलश शोभायात्रा, श्यामा संदेश पत्रिका, मासिक भजन संध्या, श्यामा भोग एवं अग्निकांड पीड़ितों के बीच साड़ी समेत अन्य राहत सामग्री वितरण इत्यादि कार्यों का क्रियान्वयन किया गया। विदित हो कि वर्ष 2002 में माधवेश्वर परिसर अवस्थित सभी मंदिरों का सौन्दर्यीकरण मेरा सपना नही रहा अपितु खंडहर हो रहे तारा मंदिर के समग्र जीर्णोद्धार तथा रुद्रेश्वरी काली के रिसते गुम्बदों के नवीकरण का कार्य माधवेश्वर प्रांगण विकास समिति के सचिव के रूप में संपन्न करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त है।

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