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भाजपा एमएलसी व कशिश न्यूज के मालिक सुनील चौधरी पर आर्थिक शोषण का आरोप?

न्यूज डेस्क ,भारत वीकली। पहले रांची और अब पटना से प्रसारित बिहार झारखंड का रीजनल न्यूज चैनल कशिश न्यूज के मालिक और दरभंगा के भाजपा के एमएलसी सुनील चौधरी पर उन्हीं के चैनल में पूर्व में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह ने गंभीर आरोप लगाया है!

संतोष सिंह ने फेसबुक वॉल पर पोस्ट कर लिखा है “

तीन चार दिन पहले मरगूब आलम को किसी खबर के सिलसिले में फोन किए काफी देर तक बातचीत हुई और मैंने कहा उपेन्द्र कुशवाहा पर ध्यान रखना मैं रोसड़ा आ गया हूंं खेला होने वाला है। बातचीत के दौरान मरगूब ने कहा कि कुछ पता है मैंने कहा क्या ,कशिश में किसी से बात नहीं हुई है ना कहां किसी से बात हुई है अब क्या रखा है कशिश तुम तो मेरा वसूल जानते ही हो जहां छोड़ दिए फिर पलट कर देखने नहीं जाते हैं ।वैसे हुआ क्या है बीजेपी के कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ उस पर अशोक मिश्रा मुझे सस्पेंडकर दिया है सात दिनों के लिए। मैंने कहा अशोक मिश्रा और सीएमडी से बात करे ये तो सही नहीं है तुम साले सब कुछ छोड़ दिए कशिश के कारण ना ना संतोष जी आपको मेरी कसम किसी से बात मत कीजिएगा प्लीज। खैर बात आई बात गयी आज सुबह 9 बजे के करीब मरगूब का फोन आया मुझे लगा छठ का शुभकामना के लिए फोन कर रहा है फोन उठाते ही बोला संतोष जी मैं जा रहा हूं इस्तीफा देने। देने से पहले मुझे लगा आपको बता दे ठीक है जाओ रात में बात करते हैं तुम तो मुझे रोक दिए बात करने से खैर शुभकामना है, तुम निर्णय ले ही लिए हो तो फिर जाओ । अभी फोन करने के लिए मोबाइल उठाए ही थे की बहुत ऐसी बातें याद आनी शुरु हो गयी कि फिर कॉल करने का मन नहीं किया मरगूब आलम भले ही कुर्सी का पुजारी रहा है। लेकिन मेरा उससे ऐसी दोस्ती रही कि कभी संपादक और रिपोर्टर जैसा रिश्ता रहा ही नहीं हम दोनों का एक कोमन गर्लफ्रेंड था जिसके लिए किसी भी हद को पार कर देते थे ।

लेकिन एक खासियत रहा उस कोमन गर्लफ्रेंड को लेकर ना कभी ईर्ष्या रहा ना कभी इस बात को लेकर आपस में कोई विवाद हुआ हम दोनों के बीच इसको लेकर जबरदस्त अंडरस्टैंडिंग रहा । वैसे ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है उस गर्लफ्रेंड का नाम खबर है हाहहाहाहहा। लेकिन पहली बार एक बात मेरे दिल को लग गया पता नहीं इसका परिणाम क्या होगा उस मरगूब आलम को जिसने कशिश के लिए क्या नहीं किया उसके साथ इस तरह का व्यवहार पता नहीं क्यों परेशान किया हुए है । जब से सुनील चौधरी बीजेपी के करीब आये उस दिन से मैं खुद अपने आपको आँफ एयर कर लिया ताकी इस व्यक्ति को टिकट लेने में परेशानी ना हो क्यों कि मुझे पता था दरभंगा से चुनाव लड़ा तो मेरी जरूरत पड़ेगा ही पड़ेगा। ऐसे में मुझे लगा कि यह व्यक्ति दुविधा में क्यों रहे मैं ही अपने आपको अलग कर लेते हैं ये चाह भी यही रहा था इसका एहसास मुझे हो ही रहा था धीरे धीरे मैं अपने आपको अलग करने लगा उस दौरान कई लोगों ने कहा आप छोड़ दीजिए लेकिन मेरा मानना था कि सुनील चौधरी ने मुझ पर बहुत भरोसा किया है ऐसे में विधान पार्षद के चुनाव तक किसी तरह से खींचते हैं । टिकट मिला प्रचार चरम पर था मेरा एक जिद्द हमेशा से रहा है बिन बुलाए और बिना मतलब का कभी किसी के यहां नहीं जाते हैं ना कॉल करते हैं । सुनील चौधरी के साथ 8 वर्षों का साथ रहा लेकिन मैं आठ बार भी कॉल नहीं किए होंगे खैर उन्हें लगा मेरा दरभंगा आना जरुर है फिर एक दिन काँल आया संतोष जी आपका आना जरूरी है। हालांकि मुझे पता था कि बहुत मजबूरी में ये आदमी मुझे बुला रहा है कोई और चारा नहीं बचा है इसलिए मुझे कॉल किया है फिर उन सवालों के बीच लगातार 20 दिनों तक दरभंगा में रहे और जो संभव था किए। इस दौरान अक्सर लोग पुछते थे संतोष जी आप बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं मैं ऐसे सवाल करने वाले लोगों को कहता था बीजेपी के लिए नहीं सुनील चौधरी के लिए वोट मांग रहे हैं वह दिन आज भी याद है मुझे वोट की गिनती हो रही थी अंतिम दौर का और ये व्यक्ति रो रहा था संतोष जी अब कही के नही रहेंगे सब कुछ खत्म हो जाएगा और मैं निश्चित था क्यों कि मुझे हर एक वोट का ट्रेंड पता था क्यों कि जो वोटर कांग्रेस को अपना प्रथम वरीयता दिया था उसमें से बहुत सारे ऐसे वोटर थे जिसका दूसरा वरीयता सुनील चौधरी को मिला है ये सिर्फ मुझे पता था खैर चंद वोट से ये चुनाव जीत गये लेकिन मुझे पता था कि हम दोनों के बीच रिश्ते का यह आखिरी क्षण गुजर रहा है किसी भी समय जुदा जुदा होना तय है । इसी बीच पटना में मेरी कुर्सी पर बैठने के लिए व्याकुल आत्मा परेशान था कि कही फिर दोनों के बीच पूराना प्यार ना जग जाए लेकिन मैं मन बना लिया था कि मुझे जाना है बस समय का इन्तजार कर रहा था क्यों कि मेरी बेटी का 12वीं का परीक्षा होने वाला था ऐसे में नौकरी छोड़ने की बात घर में नहीं करना चाहते थे पता नहीं इसका असर बच्चों पर क्या पड़ेगा । खैर एक दिन सुनील चौधरी का फोन आया संतोष जी बीजेपी के बारे में सोशल मीडिया पर भी लिखना बंद कर दीजिए बहुत लोग कहता है मुझे। पता था बिहार बीजेपी और दरभंगा मधुबनी का सांसद तो नहीं ही कह सकता है हां सड़क छाप पंडित जो बीजेपी का सड़क छाप नेता इन्हेंं जरूर कहता होगा मैंने सीधे कह दिया सोशल पेज मेरा व्यक्तिगत पेज है खैर इस वजह से आपको परेशानी हो रही है तो आदेश करिए फिर एक दिन आमने सामने बात हुई और चंद मिनट मेंं यह जानते हुए कि मुझसे ये व्यक्ति झूठ बोल रहा है बाय बाय करके चल दिए फिर भी मुझे कोई शिकायत नहीं रहा मेरा लाखों रुपया आज भी रखे हुए है चंद माह में देने की बात कहा था लेकिन आज तक नहीं दिया है। जिस दिन बेटी का जेईई मेन में अच्छे रैक के साथ रिजल्ट आया तो मैंने इसे मैसेज किया आज मुझे पैसे की जरूरत है बेटी के लिए उम्मीद है आप मुझे सहयोग करेंगे लेकिन इस आदमी ने फोन करना भी मुनासिब नहींं समझा खैर फिर भी मुझे तकलीफ नहीं हुई वो अपना धर्म निभा रहा है मैं अपना धर्म निभा रहा हूं । लेकिन आज मरगूब आलम को जिस तरीके से निकाला गया यह देख कर मुझे अंदर से हिला कर रख दिया और पहली बार मुझे लगा सारी दुनिया के लिए न्याय की लड़ाई लड़ता रहता हूं लेकिन आज मरगूब आलम के साथ जो कुछ भी हुआ चुपचाप सह लू तो फिर जीवन भर अपने आपको माफ नहीं कर पाएंगे हालांकि मरगूब आलम को आज मैने कहा क्या करना है बोलो, नहीं संतोष जी प्लीज छोड़ दीजिए नहीं मरगूब बहुत हो गया है अभी तक इस व्यक्ति का मैं सम्मान करता था इतना कुछ होने के बावजूद भी। लेकिन अब बहुत हो गया खैर तुम सोच कर बताओ करना क्या है इसे जवाब मिलना जरूरी है इसको अभी तक आदमी से भेट नहीं हुआ है कल से इसको बताते हैं पत्रकारिता की ताकत क्या होती है।

ये तस्वीर 23 सितंबर 2014 की है जब इसको कशिश में ज्वाइन कराये थे।

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